दुग्ध समितियों के चुनाव में मुकेश बोरा का दबदबा कायम,12वीं बार मुकेश बोरा,तीसरी बार गोविंद सिंह मेहता निर्विरोध

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  मुकेश बोरा ने फिर कायम रखा दबदबा, गोविंद मेहता की जीत, पूर्व चेयरमैन को बड़ा झटका लालकुआं, नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड के पर्वतीय क्षेत्र की 245 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों में प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पदों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। अधिकांश समितियों में पदाधिकारियों का निर्विरोध निर्वाचन होने से दुग्ध उत्पादकों एवं समिति सदस्यों में खासा उत्साह देखने को मिला। कुल 245 समितियों में से 238 समितियों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ, जबकि सात समितियों में चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से पदाधिकारियों का चयन किया गया। निर्वाचन में नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष मुकेश बोरा ने च्यूरीगाड़ दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति से अध्यक्ष पद पर लगातार 12वीं बार निर्विरोध जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ कायम रखी। बताया गया कि वर्ष 1996 से वह लगातार समिति के अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित होते आ रहे हैं।वहीं दुग्ध संघ के संचालक मंडल द्वारा सदस्य गोविंद सिंह मेहता ने बिंदुखत्ता रावत नगर सेकेंड दुग्ध समिति से तीसरी बार अध्यक्ष प...

देहरादून:धामी सरकार का बड़ा फैसला,ESMA लागू,6 महीने तक कर्मचारियों की हड़ताल पर रोक,

6 महीने तक कर्मचारियों की हड़ताल पर रोक

6 महीने तक नहीं होगी हड़ताल... धामी सरकार ने ESMA लागू कर कर्मचारियों को दिया सख्त संदेश

उत्तराखंड सरकार ने राज्य कर्मचारियों की हड़ताल पर बड़ी रोक लगा दी है। सचिव कार्मिक शैलेष बगोली ने आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम यानी ESMA लागू करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके तहत अगले छह महीने तक, यानी जनवरी 2027 तक राज्य कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकेंगे।

उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) लागू कर दिया है। सचिव कार्मिक शैलेष बगोली द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब राज्य कर्मचारी अगले छह महीने तक, यानी जनवरी 2027 तक हड़ताल नहीं कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि यह फैसला आवश्यक सरकारी सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने और आम जनता को किसी तरह की परेशानी से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है।


ESMA लागू होने के दौरान यदि कोई कर्मचारी या संगठन हड़ताल करता है, तो उसके खिलाफ अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इस फैसले के बाद कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रिया पर भी सभी की नजर रहेगी। 

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