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दुग्ध समितियों के चुनाव में मुकेश बोरा का दबदबा कायम,12वीं बार मुकेश बोरा,तीसरी बार गोविंद सिंह मेहता निर्विरोध

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  मुकेश बोरा ने फिर कायम रखा दबदबा, गोविंद मेहता की जीत, पूर्व चेयरमैन को बड़ा झटका लालकुआं, नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड के पर्वतीय क्षेत्र की 245 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों में प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पदों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। अधिकांश समितियों में पदाधिकारियों का निर्विरोध निर्वाचन होने से दुग्ध उत्पादकों एवं समिति सदस्यों में खासा उत्साह देखने को मिला। कुल 245 समितियों में से 238 समितियों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ, जबकि सात समितियों में चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से पदाधिकारियों का चयन किया गया। निर्वाचन में नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष मुकेश बोरा ने च्यूरीगाड़ दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति से अध्यक्ष पद पर लगातार 12वीं बार निर्विरोध जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ कायम रखी। बताया गया कि वर्ष 1996 से वह लगातार समिति के अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित होते आ रहे हैं।वहीं दुग्ध संघ के संचालक मंडल द्वारा सदस्य गोविंद सिंह मेहता ने बिंदुखत्ता रावत नगर सेकेंड दुग्ध समिति से तीसरी बार अध्यक्ष प...

रामपुर,जब नवाब की अपनी थी प्राइवेट ट्रेन,बोगियों में बेडरूम,डाइनिंग रूम,किचन और आराम की तमाम सुविधाएं थीं मौजूद

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 जब नवाब की अपनी थी प्राइवेट ट्रेन आज हम आपको भारत के इतिहास का एक ऐसा दिलचस्प किस्सा बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर शायद आप भी हैरान रह जाएंगे। एक समय ऐसा था जब उत्तर प्रदेश की रामपुर रियासत के नवाब के पास अपनी निजी ट्रेन हुआ करती थी और उनके महल तक रेलवे लाइन बिछी हुई थी। रामपुर रियासत के नौवें नवाब हामिद अली खान ने मिलक से रामपुर तक करीब 40 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बनवाई। साल 1925 में उन्होंने अपनी जरूरत के मुताबिक चार विशेष रेल बोगियां तैयार करवाईं। इन बोगियों में बेडरूम, डाइनिंग रूम, किचन और आराम की तमाम सुविधाएं मौजूद थीं। जब भी नवाब को सफर करना होता, उनकी निजी बोगियों को नियमित ट्रेन के साथ जोड़ दिया जाता था। देश के विभाजन के समय भी इस शाही ट्रेन का इस्तेमाल लोगों को सुरक्षित पाकिस्तान पहुंचाने के लिए किया गया। आजादी के बाद 1954 में नवाब ने अपनी चार बोगियों में से दो भारत सरकार को सौंप दीं। 1966 में नवाब रजा अली खान के निधन के बाद इस शाही ट्रेन का सफर भी इतिहास बनकर रह गया। सोचिए जिस दौर में आम लोगों के लिए रेल यात्रा भी एक बड़ी बात थी, उस दौर में एक नवाब अपनी निजी ट्रेन से सफर...

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