दुग्ध समितियों के चुनाव में मुकेश बोरा का दबदबा कायम,12वीं बार मुकेश बोरा,तीसरी बार गोविंद सिंह मेहता निर्विरोध

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  मुकेश बोरा ने फिर कायम रखा दबदबा, गोविंद मेहता की जीत, पूर्व चेयरमैन को बड़ा झटका लालकुआं, नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड के पर्वतीय क्षेत्र की 245 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों में प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पदों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। अधिकांश समितियों में पदाधिकारियों का निर्विरोध निर्वाचन होने से दुग्ध उत्पादकों एवं समिति सदस्यों में खासा उत्साह देखने को मिला। कुल 245 समितियों में से 238 समितियों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ, जबकि सात समितियों में चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से पदाधिकारियों का चयन किया गया। निर्वाचन में नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष मुकेश बोरा ने च्यूरीगाड़ दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति से अध्यक्ष पद पर लगातार 12वीं बार निर्विरोध जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ कायम रखी। बताया गया कि वर्ष 1996 से वह लगातार समिति के अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित होते आ रहे हैं।वहीं दुग्ध संघ के संचालक मंडल द्वारा सदस्य गोविंद सिंह मेहता ने बिंदुखत्ता रावत नगर सेकेंड दुग्ध समिति से तीसरी बार अध्यक्ष प...

उत्तराखंड के जंगलों में AI की 'एंट्री,हल्द्वानी वन प्रभाग ने पहली बार पेड़ों पर लगाए अकूस्टिक रिकॉर्डर...

उत्तराखंड के जंगलों में AI की 'एंट्री

उत्तराखंड के जंगलों में AI की 'एंट्री': हल्द्वानी वन प्रभाग ने पहली बार पेड़ों पर लगाए अकूस्टिक रिकॉर्डर,पक्षियों की आवाज सुनकर ही उनकी प्रजाति बता देगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

उत्तराखंड का वन विभाग अब जंगलों में छिपे वन्यजीवों और पक्षियों की निगरानी के लिए हाईटेक हो गया है। सूबे में पहली बार हल्द्वानी वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले जंगलों में'अकूस्टिक रिकॉर्डर' डिवाइस (ध्वनि यंत्र) लगाए गए हैं। इस अनूठी तकनीक के जरिए अब पक्षियों को बिना देखे, सिर्फ उनकी चहचहाहट और आवाज के आधार पर उनकी सटीक प्रजाति का पता लगाया जा सकेगा। इसके लिए वन विभाग 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) तकनीक का सहारा ले रहा है।

नंधौर अभ्यारण्य में शुरू हुआ अनूठा प्रयोग

यह देश और प्रदेश के चुनिंदा प्रयोगों में से एक है,जिसे पहली बार हल्द्वानी डिवीजन के अंतर्गत 'नंधौर वन्य जीव अभ्यारण्य' में अमलीजामा पहनाया गया है। नंधौर अभ्यारण्य हमेशा से ही देशी-विदेशी पक्षियों के प्रवास के लिए सबसे मुफीद जगहों में से एक रहा है। यही वजह है कि सालभर यहां बड़ी संख्या में पक्षी प्रेमी (बर्ड वॉचर्स) पहुंचते हैं। अब इस नए प्रयोग से यहां पक्षियों के संरक्षण और उनकी गणना में एक नई क्रांति आने की उम्मीद है। वन विभाग जंगलों में 'वाइल्डलाइफ अकूस्टिक रिकॉर्डर' नामक डिवाइस का इस्तेमाल कर रहा है। इन डिवाइसेस को पेड़ों और पक्षियों के प्राकृतिक आवासों के पास लगाया जाता है। यह डिवाइस 24 घंटे पक्षियों की आवाजों को रिकॉर्ड करती है। इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर के माध्यम से उस आवाज का मिलान डेटाबेस से किया जाता है। पलक झपकते ही AI तकनीक यह पहचान लेती है कि वह आवाज किस प्रजाति के पक्षी की है। इससे उन दुर्लभ पक्षियों का भी पता चल सकेगा, जो घने जंगलों में इंसानी नजरों से छिपे रहते हैं।

एक हफ्ते में ही मिले चौंकाने वाले नतीजे

हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ कुंदन कुमार ने बताया कि नंधौर वन्य जीव अभ्यारण्य में इस तकनीक का एक हफ्ते का ट्रायल किया गया, जिसके बेहद सकारात्मक और चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। महज एक हफ्ते के भीतर ही इस वॉइस डिवाइस और AI तकनीक के माध्यम से 140 से अधिक अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों की पहचान की जा चुकी है नंधौर में मिली शुरुआती सफलता के बाद अब विभाग इस योजना को बड़े स्तर पर विस्तार देने जा रहा है। हल्द्वानी डिवीजन के अंतर्गत आने वाली सभी 5 रेंजों में इन 'अकूस्टिक रिकॉर्डर' डिवाइसेस को लगाया जाएगा। इसके बाद पूरे डिवीजन में मौजूद पक्षियों की प्रजातियों का एक सटीक डिजिटल डेटाबेस तैयार हो सकेगा जो भविष्य में वाइल्डलाइफ रिसर्च और पर्यावरण संतुलन को समझने में मील का पत्थर साबित होगा।


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