दुग्ध समितियों के चुनाव में मुकेश बोरा का दबदबा कायम,12वीं बार मुकेश बोरा,तीसरी बार गोविंद सिंह मेहता निर्विरोध

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  मुकेश बोरा ने फिर कायम रखा दबदबा, गोविंद मेहता की जीत, पूर्व चेयरमैन को बड़ा झटका लालकुआं, नैनीताल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड के पर्वतीय क्षेत्र की 245 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों में प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पदों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। अधिकांश समितियों में पदाधिकारियों का निर्विरोध निर्वाचन होने से दुग्ध उत्पादकों एवं समिति सदस्यों में खासा उत्साह देखने को मिला। कुल 245 समितियों में से 238 समितियों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ, जबकि सात समितियों में चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से पदाधिकारियों का चयन किया गया। निर्वाचन में नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष मुकेश बोरा ने च्यूरीगाड़ दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति से अध्यक्ष पद पर लगातार 12वीं बार निर्विरोध जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ कायम रखी। बताया गया कि वर्ष 1996 से वह लगातार समिति के अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित होते आ रहे हैं।वहीं दुग्ध संघ के संचालक मंडल द्वारा सदस्य गोविंद सिंह मेहता ने बिंदुखत्ता रावत नगर सेकेंड दुग्ध समिति से तीसरी बार अध्यक्ष प...

पेपर लीक पर सरकार का प्रहार,10 साल की जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने की तैयारी

10 साल की जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने की तैयारी

हल्द्वानी,देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून को और सख्त बनाने के लिए संशोधित विधेयक ला सकती है।

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, पेपर लीक, प्रश्नपत्र बेचने, संगठित नकल कराने या ऐसे अपराध में शामिल पाए जाने पर दोषियों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाने का प्रस्ताव है, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। साथ ही पेपर लीक से अर्जित संपत्ति जब्त करने, डिजिटल साक्ष्यों और बैंक लेनदेन की जांच को कानूनी मजबूती देने की भी तैयारी है।सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद युवाओं के भविष्य की रक्षा करना, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक माफिया पर प्रभावी लगाम लगाना है।

बताया जा रहा है कि यह संशोधित विधेयक 27 जुलाई को संसद में पेश किया जा सकता है। अब देखना होगा कि नए कानून से पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कितनी प्रभावी रोक लग पाती है।



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