हल्द्वानी:कॉलेज पर कब्जे की जंग,मरियम कॉलेज विवाद गहराया,फर्जीवाड़े और कब्जे की साजिश के आरोप

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मरियम पैरामेडिकल कॉलेज पर कब्जे के आरोप, पुलिस जांच की मांग हल्द्वानी के मरियम पैरामेडिकल कॉलेज को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कॉलेज के संस्थापक पक्ष ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और मुखानी थाना पुलिस को शिकायत देकर कॉलेज की संपत्ति पर कथित अवैध कब्जा, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, फर्जी बैंक खाता खोलने, छात्रों की फीस के कथित दुरुपयोग और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।   संस्थापक पक्ष का कहना है कि वर्ष 2009 में स्थापित मरियम पैरामेडिकल कॉलेज की देखरेख फरवरी 2024 में तत्कालीन अध्यक्ष के न्यायिक अभिरक्षा में जाने के बाद अस्थायी रूप से एक शिक्षिका को सौंपी गई थी। आरोप है कि बाद में कुछ लोगों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर कॉलेज के संचालन और संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की। शिकायत में बिना अनुमति बैंक खाता खोलने और छात्रों की फीस के कथित दुरुपयोग के भी आरोप लगाए गए हैं। वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से भी मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन को शिकायत भेजकर संस्थापक पक्ष पर कॉलेज में पहुंचकर अभद्रता और धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। ...

पेपर लीक पर सरकार का प्रहार,10 साल की जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने की तैयारी

10 साल की जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने की तैयारी

हल्द्वानी,देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून को और सख्त बनाने के लिए संशोधित विधेयक ला सकती है।

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, पेपर लीक, प्रश्नपत्र बेचने, संगठित नकल कराने या ऐसे अपराध में शामिल पाए जाने पर दोषियों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाने का प्रस्ताव है, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। साथ ही पेपर लीक से अर्जित संपत्ति जब्त करने, डिजिटल साक्ष्यों और बैंक लेनदेन की जांच को कानूनी मजबूती देने की भी तैयारी है।सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद युवाओं के भविष्य की रक्षा करना, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक माफिया पर प्रभावी लगाम लगाना है।

बताया जा रहा है कि यह संशोधित विधेयक 27 जुलाई को संसद में पेश किया जा सकता है। अब देखना होगा कि नए कानून से पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कितनी प्रभावी रोक लग पाती है।



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