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हल्द्वानी:कॉलेज पर कब्जे की जंग,मरियम कॉलेज विवाद गहराया,फर्जीवाड़े और कब्जे की साजिश के आरोप

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मरियम पैरामेडिकल कॉलेज पर कब्जे के आरोप, पुलिस जांच की मांग हल्द्वानी के मरियम पैरामेडिकल कॉलेज को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कॉलेज के संस्थापक पक्ष ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और मुखानी थाना पुलिस को शिकायत देकर कॉलेज की संपत्ति पर कथित अवैध कब्जा, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, फर्जी बैंक खाता खोलने, छात्रों की फीस के कथित दुरुपयोग और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।   संस्थापक पक्ष का कहना है कि वर्ष 2009 में स्थापित मरियम पैरामेडिकल कॉलेज की देखरेख फरवरी 2024 में तत्कालीन अध्यक्ष के न्यायिक अभिरक्षा में जाने के बाद अस्थायी रूप से एक शिक्षिका को सौंपी गई थी। आरोप है कि बाद में कुछ लोगों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर कॉलेज के संचालन और संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की। शिकायत में बिना अनुमति बैंक खाता खोलने और छात्रों की फीस के कथित दुरुपयोग के भी आरोप लगाए गए हैं। वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से भी मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन को शिकायत भेजकर संस्थापक पक्ष पर कॉलेज में पहुंचकर अभद्रता और धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। ...

रामपुर,जब नवाब की अपनी थी प्राइवेट ट्रेन,बोगियों में बेडरूम,डाइनिंग रूम,किचन और आराम की तमाम सुविधाएं थीं मौजूद

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 जब नवाब की अपनी थी प्राइवेट ट्रेन आज हम आपको भारत के इतिहास का एक ऐसा दिलचस्प किस्सा बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर शायद आप भी हैरान रह जाएंगे। एक समय ऐसा था जब उत्तर प्रदेश की रामपुर रियासत के नवाब के पास अपनी निजी ट्रेन हुआ करती थी और उनके महल तक रेलवे लाइन बिछी हुई थी। रामपुर रियासत के नौवें नवाब हामिद अली खान ने मिलक से रामपुर तक करीब 40 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बनवाई। साल 1925 में उन्होंने अपनी जरूरत के मुताबिक चार विशेष रेल बोगियां तैयार करवाईं। इन बोगियों में बेडरूम, डाइनिंग रूम, किचन और आराम की तमाम सुविधाएं मौजूद थीं। जब भी नवाब को सफर करना होता, उनकी निजी बोगियों को नियमित ट्रेन के साथ जोड़ दिया जाता था। देश के विभाजन के समय भी इस शाही ट्रेन का इस्तेमाल लोगों को सुरक्षित पाकिस्तान पहुंचाने के लिए किया गया। आजादी के बाद 1954 में नवाब ने अपनी चार बोगियों में से दो भारत सरकार को सौंप दीं। 1966 में नवाब रजा अली खान के निधन के बाद इस शाही ट्रेन का सफर भी इतिहास बनकर रह गया। सोचिए जिस दौर में आम लोगों के लिए रेल यात्रा भी एक बड़ी बात थी, उस दौर में एक नवाब अपनी निजी ट्रेन से सफर...

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